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The jaipur pink city of india Yuneshko पिंक सिटी जयपुर तीसरी बार युनेस्को को की विश्व धरोहर में शामिल ( सारे जगत में म्हारे प्रदेश रो नाम गूंज रहयो )

सारे जगत में म्हारे प्रदेश रो नाम गूंज रहयो हैं  सभी जयपुर और भारत वासियों को बहुत बहुत बधाई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विश्व विख्यात गुलाबी नगरी पिंक सिटी जयपुर का नाम तीसरी बार विश्व धरोहर सूची यूनेस्कों में शामिल किया गया है यह राजस्थान और हम सब जयपुर वासियों के लिए बहुत ही गौरव का दिन हैं भारत के सबसे खुबसूरत शहरों में शुमार जयपुर नगरी की अपनी एक अलग ही विशेष पहचान हैं देश के बड़े बड़े से व्यक्ति से लेकर हर छोटे से छोटे शक्श को यह नगरी बहुत ही भाति हैं प्रधानमंत्री मोदी को भी जयपुर शहर से बहुत ज्यादा लगाव हैं और इसी विशेष मोके पर उन्होंने जयपुर और राजस्थान वासियों को ट्विटर पर बधाई दी यहाँ तक की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी जयपुर वासियों को बहुत बहुत बधाई दी इस बार जयपुर की चारदीवारी परकोटे को युनेशकों की विश्व धरोहर में शामिल किया हैं जबकि इससे पहले दो बार आमेर और जंतर मंतर जयपुर को इस सूची में स्थान मिल चूका हैं तो यह भी हमारे लिए गौरव की बात हैं की हम तीसरी बार विश्व धरोहर में शामिल हुए हैं जयपुर शहर हमेशा...

आखिर क्यों भगवान कृष्णा अपने सर पर मोरपंख धारण करते हैं जानिए इसके पीछे की पूरी कथा After all, why Lord Krishna puts a peacock on his head, know the whole story behind it.

इसका एक जो प्रमुख कारण ये हैं सारे संसार में मोर ही एकमात्र ऐसा प्राणी माना जाता है जो अपने सम्पूर्ण जीवन में ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करता है. मोरनी का गर्भ धारण मोर के आँसुओ को पीकर होता है. अतः इतने पवित्र पक्षी के पंख को स्वयं भगवान श्री कृष्ण अपने मष्तक पर धारण करते हैं और दूसरा जो कारण हैं उसके पीछे एक कथा हैं जो भगवान श्री कृष्ण के कालखंड की हैं बचपन से ही माता यशोदा अपने लल्ला के सर पर मोर पंख को सजाती थीं. बड़े होने के बाद कृष्ण खुद भी इसे अपने सर सजाते रहे हैं, जिसका कारण है कि स्वयं भगवान भी मोर की ही तरह पवित्र हैं. भले ही उन्हें रास रचैया कहा जाता है, लेकिन वो इन सब से बहुत दूर रहे हैं. भगवान श्री कृष्ण की लीला का समय था, गोकुल में एक मोर रहता था, वह मोर बहुत चतुर था और श्री कृष्ण का भक्त था, वह श्री कृष्ण की कृपा पाना चाहता था। एक मयुर कृष्ण का दीवाना बन कर कृष्ण के द्वार पर खङा हो गया,हर पल वह गीत गाता हे साँवरे तुम ही माता,तुम ही पिता तुम ही मेरे रक्षक तेरे बिन मेरा कौन सहारा हे श्याम मुरारी!! पर समय गुजरता जाये एक दिन से ,एक वर्ष गुजरने को आया पर भगव...

Know the miracles and mysteries of Banke Bihari ji in Kali Yuga बांके बिहारी की कहानी

if you read in english please click on translate आज हम आपको एक ऐसी पावन भूमि के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल के बारे में पूरी जानकारी देंगें, उस पवित्र धाम का नाम हैं श्री बांके बिहारी मंदिर और उसके बाद हमारी अगली पोस्ट में हम आपको श्री धाम वृन्दावन के समस्त दर्शनीय स्थलों से अवगत कराएँगे उस परम पावन भूमि भगवान श्री कृष्ण की लीलास्थली श्रीधाम वृंदावन के बारे में मान्यता है कि एक बार जो यहां आ गया वो यही का हो कर रह जाता है अर्थात उसका तन मन बांकेबिहारी जी की छवि में खो जाता है , बांके बिहारी भगवान श्रीकृष्ण का ही एक सबसे प्रसिद्व नाम है यह मन्दिर श्री वृन्दावन धाम के एक सुन्दर इलाके में स्थित है। कहा जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण स्वामी श्री हरिदास जी के वंशजो के सामूहिक प्रयास से संवत १९२१ के लगभग किया गया। स्वामी श्री हरिदाजी बांके बिहारी के सबसे प्रिय भक्त थे उनके भजन–कीर्तन से प्रसन्न हो निधिवन से श्री बाँकेबिहारीजी प्रकट हुये थे। स्वामी हरिदास जी का जन्म संवत 1536 में भाद्रपद महिने के शुक्ल पक्ष में अष्टमी के दिन वृन्दावन के निकट राजपुर नामक गाँव में हूआ था। इनके आराध्यदे...